कानन पेंडारी में शब्दों की महक से सजा साहित्यिक उत्सव, 03 पुस्तकों का विमोचन




कानन पेंडारी में शब्दों की महक से सजा साहित्यिक उत्सव, 03 पुस्तकों का विमोचन
57 साहित्यकारों को मिला ‘साहित्य गौरव सम्मान-2026’, मंच के बैनर तले विमोचित पुस्तकों की संख्या पहुंची 87
   बिलासपुर (छत्तीसगढ़ महिमा)। 21 सितंबर 2026, प्रकृति की सुरम्य छटा, कविता की मधुर लय और साहित्यकारों के सम्मान से रविवार को कानन पेंडारी जूलॉजिकल पार्क का वातावरण अनूठे साहित्यिक उत्सव में बदल गया। राष्ट्रीय सेवा रत्न सम्मान एवं राष्ट्रीय प्रतिष्ठा पुरस्कार प्राप्त समिति छत्तीसगढ़ कलमकार मंच, मस्तूरी के तत्वावधान में 20 सितंबर को पुस्तक विमोचन, काव्य-गोष्ठी एवं साहित्यकार सम्मान समारोह का गरिमामय आयोजन किया गया। कार्यक्रम में 03 पुस्तकों का विमोचन हुआ तथा विभिन्न जिलों से पहुंचे 57 साहित्यकारों को ‘साहित्य गौरव सम्मान - 2026’ से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ साहित्यकारों की टीम द्वारा कानन पेंडारी के जंगल सफारी भ्रमण से हुआ। प्राकृतिक सुषमा से आच्छादित कानन पेंडारी में शेड के नीचे सजे आयोजन स्थल पर साहित्य, संस्कृति और प्रकृति का सुंदर संगम देखने को मिला। नवागढ़-बेमेतरा से पहुंचे विख्यात गायक-कवि एवं मंच के उपाध्यक्ष जुगेश बंजारे ‘धीरज’ ने प्रभावी उद्घोषणा के साथ कार्यक्रम को गति प्रदान की। शेर की रोमांचकारी दहाड़ के बीच बिलासपुर, बेमेतरा, रायपुर, मुंगेली, जांजगीर, कोरबा, रायगढ़ एवं बलौदाबाजार सहित विभिन्न जिलों से पहुंचे कलमकारों का पुष्पमालाओं से आत्मीय स्वागत किया गया। साहित्यिक आयोजन की शुरुआत भारतीय संविधान की प्रस्तावना के सामूहिक वाचन से हुई। इसके पश्चात करतल ध्वनि के बीच तीन महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन किया गया। प्रथम पुस्तक ‘धरोहर’ राष्ट्रीय साझा संकलन का विमोचन हुआ, जिसका संपादन डॉ. किशन टण्डन ‘क्रान्ति’ तथा संकलन श्री सुरजीत ने किया है। 231 पृष्ठों की इस कृति में 56 कलमकारों के जीवन परिचय एवं उनकी श्रेष्ठ रचनाओं को स्थान दिया गया है। इसके बाद डॉ. किशन टण्डन ‘क्रान्ति’ की 02 कृतियों—‘बचपन’ बाल कविता-गीत संग्रह तथा ‘पथ की पहचान’ काव्य संग्रह का विमोचन किया गया। ये दोनों कृतियां क्रमशः उनकी 82वीं और 83 वीं कृति हैं।
      सवा चार वर्ष में 87 पुस्तकों का विमोचन
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ कलमकार मंच के संस्थापक - अध्यक्ष डॉ. किशन टण्डन ‘क्रान्ति’ ने उपस्थित साहित्यकारों का अभिनंदन करते हुए आयोजन के उद्देश्यों एवं साहित्यिक गतिविधियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने साझा संकलन में शामिल सभी रचनाकारों को बधाई देते हुए कहा कि मंच के तत्वावधान में एक ही आयोजन में तीन पुस्तकों का विमोचन होना साहित्य जगत के लिए हर्ष का विषय है। उन्होंने बताया कि इन तीन पुस्तकों को मिलाकर मंच के बैनर तले अब तक विमोचित पुस्तकों की संख्या 87 हो गई है। उन्होंने कहा कि सवा चार वर्ष की अवधि में 87 पुस्तकों का विमोचन साहित्यिक गतिविधियों की निरंतरता और रचनाकारों के सृजनात्मक उत्साह को दर्शाता है। उन्होंने यह भी बताया कि इस आयोजन के साथ मंच द्वारा सम्मानित कलमकारों की संख्या 1601 हो गई है। यह आयोजन मंच का 28 वां आयोजन रहा।
  कविता की गूंज से सराबोर हुआ कानन पेंडारी
पुस्तक विमोचन के बाद काव्य-गोष्ठी का दौर शुरू हुआ। विभिन्न जिलों से पहुंचे कवियों ने अपनी मनभावन एवं भावपूर्ण रचनाओं की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। काव्य पाठ के दौरान पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा। कानन पेंडारी भ्रमण के लिए पहुंचे लोग भी कविताओं की आवाज सुनकर ठिठकते और साहित्यिक प्रस्तुतियों का आनंद लेते दिखाई दिए। इस प्रकार प्रकृति के बीच सजी काव्य-गोष्ठी ने आयोजन को यादगार बना दिया। काव्य पाठ के उपरांत उपस्थित साहित्यकारों को मेडल पहनाकर सम्मानपत्र एवं पुस्तकें प्रदान की गईं। अतिथियों ने अपने प्रेरक उद्बोधनों के माध्यम से साहित्यकारों का उत्साहवर्धन करते हुए साहित्य-सृजन को समाज और संस्कृति से जोड़ने का संदेश दिया।
     साहित्यकारों की रही उल्लेखनीय उपस्थिति
कार्यक्रम में डॉ. गोवर्धन साहेब की अध्यक्षता तथा डॉ. गुलाबचंद कुसुम, प्राचार्य खरौद कॉलेज, डॉ. प्यारेलाल आदिले, प्राचार्य कटघोरा कॉलेज एवं शिवदत्त बंजारे, सामाजिक कार्यकर्ता के विशिष्ट आतिथ्य में आयोजन सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर मंच के उपाध्यक्ष जुगेश बंजारे ‘धीरज’, कोषाध्यक्ष बेदराम जाटवर ‘वेदांज’, सचिव नवीन कुमार कुर्रे, सेवानिवृत्त डिप्टी कलेक्टर विजय कुमार कोशले, पूर्व प्रशासनिक अधिकारी राजेन्द्र कश्यप, चतुर सिंह ‘चंचल’, लेखक सुरजीत, महेन्द्र खूँटे ‘माही’ रायपुर, मनोज समदिल, बुंदराम जांगड़े, कार्तिक पुराण घृतलहरे, श्रीमती विनीता दिनेश गेंदले, सुश्री नीतेश्वरी सूर्यवंशी, ऐन प्रसाद घृतलहरे, मोहन दास सत्ऋषु, डॉ. दानिया प्रसाद, रोहित गुमा, दिनेश गेंदले सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार एवं बाल-वृन्द उपस्थित रहे। कार्यक्रम का प्रभावी संचालन जुगेश बंजारे ‘धीरज’ ने किया। अंत में आभार प्रदर्शन के पश्चात आयोजन के समापन की घोषणा की गई। प्रकृति की गोद में पुस्तकों, कविताओं और कलमकारों के सम्मान से सजा यह साहित्यिक समारोह साहित्य-सृजन के प्रति समर्पण और रचनात्मक ऊर्जा का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया।