पाली महोत्सव 2026 निमंत्रण विवाद से सियासत गरम, अधिकारियों की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल

पाली महोत्सव 2026 निमंत्रण विवाद से सियासत गरम, अधिकारियों की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल 
 डबल इंजन सरकार में आदिवासी नेतृत्व की अनदेखी..
    विष्णु कुमार यादव जिला ब्यूरो 
कोरबा (छत्तीसगढ़ महिमा)। 14 फरवरी 2026, छत्तीसगढ़ और केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार होने के बावजूद आदिवासी जनप्रतिनिधियों की अनदेखी को लेकर चर्चा तेज हो गई है। आदिवासी बहुल क्षेत्र पाली में वर्षों से आयोजित होने वाला ऐतिहासिक पाली महोत्सव इस बार निमंत्रण पत्र विवाद को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक बहस का केंद्र बन गया है।
     15 फरवरी को भव्य शुभारंभ
 शुभारंभ समारोह में मुख्य अतिथि अरुण साव  उप मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण, नगरीय प्रशासन, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री,अध्यक्षता  लखन लाल देवांगन मंत्री, वाणिज्य, उद्योग, सार्वजनिक उपक्रम, वाणिज्यिक कर (आबकारी) एवं श्रम विशिष्ट अतिथि ज्योत्सना चरणदास महंत सांसद, लोकसभा क्षेत्र कोरबा, प्रेमचंद पटेल विधायक, कटघोरा, तुलेश्वर हीरा सिंह मरकाम – विधायक, पाली-तानाखार, फूलसिंह राठिया विधायक, रामपुर, डॉ.पवन कुमार सिंह अध्यक्ष, जिला पंचायत कोरबा,संजू देवी राजपूत महापौर, नगर पालिक निगम कोरबा, निकिता मुकेश जायसवाल उपाध्यक्ष, जिला पंचायत कोरबा,अजय जायसवाल अध्यक्ष, नगर पंचायत पाली, गिरजा सत्यनारायण पैकरा सरपंच, ग्राम पंचायत केराझरिया शाम 7 बजे शिव मंदिर घाट में शिव आरती एवं दीपोत्सव आयोजित होगा।
        16 फरवरी को समापन समारोह 
समापन समारोह में भी मुख्य अतिथि लखन लाल देवांगन तथा अध्यक्षता ज्योत्सना चरणदास महंत करेंगी। कार्यक्रम में सभी क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति प्रस्तावित है।
      वायरल निमंत्रण कार्ड से भड़का विवाद 
पाली महोत्सव का निमंत्रण पत्र व्यापक स्तर पर वितरण के बाद सोशल मीडिया और पत्रिकाओं में प्रकाशित हो गया। इसके बाद कार्ड में नामों को लेकर विवाद सामने आया, जिससे प्रशासनिक कार्यशैली सवालों के घेरे में आ गई।
 जनपद अध्यक्ष का नाम बाद में जोड़ने से बढ़ी नाराजगी
  बताया जा रहा है कि प्रारंभिक निमंत्रण पत्र में पूर्णिमा शोभा सिंह जगत अध्यक्ष जनपद पंचायत पाली का नाम शामिल नहीं था। कार्ड वायरल होने और समाचार पत्रों में प्रकाशित होने के बाद देर रात संशोधन कर उनका नाम जोड़ा गया। इस घटनाक्रम को लेकर क्षेत्र में नाराजगी और राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
 अधिकारियों की लापरवाही या सुनियोजित चूक..?
स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि इतनी बड़ी प्रशासनिक त्रुटि कैसे हुई। क्या यह तकनीकी गलती थी या अधिकारियों की मनमानी? आदिवासी नेतृत्व वाले राज्य में इस प्रकार की घटनाएं प्रशासनिक पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर रही हैं।
      क्या होगी कार्रवाई? बड़ा सवाल बरकरार
अब निगाहें प्रशासन और शासन पर टिकी हुई हैं। क्या संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई होगी या यह मामला संशोधित निमंत्रण पत्र तक सीमित रह जाएगा,यह फिलहाल बड़ा प्रश्न चिन्ह बना हुआ है। क्षेत्र में इस पूरे घटनाक्रम को लेकर चर्चा और सियासी हलचल जारी है।