नवरात्रि पर्व और गढ़ विच्छेदन दशहरा उत्सव कोसिर में
प्रेस छत्तीसगढ़ महिमा रायगढ़। 16 अक्टूबर 2021, उप तहसील कोसीर रायगढ़ जिले का बड़ा गांव है जो पश्चिम दिशा में बसा है यहां माँ कौशलेश्वरी देवी की पुरातात्विक मन्दिर है। गांव में कुशलाई मईया के नाम से जाना जाता है। चैत और कुंवार के महीना में नवरात्रि पर मेला भरता है और दूर - दूर से लोग मन्दिर दर्शन के लिए आते हैं। कोसीर गांव की देवी पुरातात्विक है यहां 9 दिन तक ज्योति कलश जलती है यहां के मन्दिर में आदिकाल से आदिवासी बैगा पुजारी हैं।
कुंवार माह के नवरात्रि में मेला भरता है और आनंद से उत्सव मनाते हैं। यहाँ मन्दिर में कई परम्परा भी है मन्दिर दर्शन को महिलाएं जब आती हैं तो उनकी मनोकामना पूर्ण होती है मन्दिर अंदर में घूंघट में नहीं रहते बेटी माईके में जैसे रहती है वैसे मन्दिर में अपना अनुभव करते हैं। बदना अर्थात जो भी माँ के मंदिर में मन्नत मांगें रहते है जल रहे आस्था के दीप का गांव के ढुकुलिया तालाब में विसर्जन किया जाता है गांव में इस तालाब को देव कुंड के नाम से भी जाना जाता है। पिछले कुछ वर्षों से यहां नवरात्रि पर भंडारा हो रही है जिन लोगों की आस्था होती है वे भंडरा के लिए रुपए दे देते हैं और जो कोसीर के स्थानीय भंडारा समिति बनी है उनके द्वारा सेवा दी जा रही है । वही पिछले कुछ वर्षों से सारंगढ़ विधायक श्रीमती उत्तरी गनपत जांगडे के द्वारा संस्कृति विभाग की सहयोग से छत्तीसगढ़ी कार्यक्रम हो रहे है जिसका आनन्द अंचल के लोग ले पा रहे हैं। वही यहां नाटक मंडली थी जो नवरात्री के समय नव दिन तक चलती थी पर अब वह नाटक मंडली पिछले 20 -25 वर्ष से अपनी प्रस्तुति नहीं कर रहे हैं जिसको पुनः जिंदा करने की जरूरत है। वर्तमान में इस तालाब की सौन्दर्यकरण का काम चल रहा है। नव निर्माण सारंगढ़ जिला होने से कोसीर गांव की मन्दिर ग्रामीण पर्यटन में जुड़ने की संभावनाएं बढ़ गई है। कोसीर गांव में रावण दहन की प्रथा नहीं है यहां रावण पुतले दहन नहीं होता है नवरात्रि के बाद यहां दशहरा पर्व मनाने की परम्परा है। कोसीर हाई स्कूल मैदान में गढ़ विच्छेदन उत्सव मनाया जाता है।गढ़ भेदन एक यहां का बड़ा उत्सव है। गढ़ विच्छेदन उसत्व गाजे बाजे के साथ मनाया जाता है बहुत रोचक होती है जिस तरह सारंगढ़ का गढ़ उत्सव 200 वर्ष पुराना है उसी तरह कोसीर,बिलाईगढ़ आदि का गढ़ उत्सव का इतिहास है। इस दिन गढ़-भेदन के बाद गढ़ - भेदन करने वाले को सम्मानित किया जाता है और बाजे गाजे के साथ मन्दिर का दर्शन कराया जाता है,यह पल अलौकिक पल होता है। कोसीर गांव के गढ़ विच्छेदन उत्सव को बड़े स्तर में बढ़ाने की जरूरत है। जिस स्थल में गढ़ भेदन होती है उस जगह का संरक्षण होनी चाहिए वहीं यह उसत्व देर शाम से रात हो जाती है वहां पानी ,बिजली की हमेशा के लिए ब्यवस्था हो जाएं तो बहुत अच्छा होगा। हमारे पूर्वजों की जो धरोहर है उसे नई पीढ़ी के लिए धरोहर के रूप में सहेजना होगा।
लक्ष्मी नारायण लहरे सह संपादक