भाग - 2
बत्ती गुल मीटर चालू : DOOR LOCK में औसतभार वाचन से कम,
बंद डिस्प्ले मीटर की जाँच: ठेकाश्रमिक की मनमानी उजागर!
लाँकडाउन में 24×7 बंद प्रतिष्ठानों का औसतभार कितना?
नगर के औसतभार का ठीकरा: किसके सर, किसने फोडा?
जागो ग्राहक जागो !!
प्रेस छत्तीसगढ़ महिमा बिलासपुर। 23 सितंबर 2021, रतनपुर डिस्प्ले बंद मीटर में बिजली के औसत खपत से अधिक वाचन दर्शाकर व्यवसायी को आर्थिक क्षति पहुँचाने की शिकायत पर विद्युत मंडल रतनपुर द्वारा पेट्रोलिंग टीम भेजकर मीटर की जाँच कराया गया। जाँच में खंभे के पास से तकनीकी खराबी के कारण आये फाल्ट को सुधार कर डिस्प्ले चालू किया गया। डिस्प्ले चालू होने के बाद रीडिंग लिये जाने पर वर्तमान वाचन अंकित रीडिंग से साढ़े छ: सौ यूनिट कम पाया गया। तात्पर्य यह कि डिस्प्ले खराब होने के बाद ठेकाश्रमिक द्वारा रीडिंग करते समय ढाई से तीन गुना अधिक यूनिट की खपत गणना पंजी में भरा जाने लगा। लाँकडाउन के दौरान 24×7 दुकान बंद रहने के बाद भी भारी भरकम बिल मिलने पर व्यवसायी परेशान हो गया। अंततः व्यवसायी द्वारा खराब डिस्प्ले वाले मीटर को बदलने हेतु वि.मं. कार्यालय में आवेदन सह शिकायत प्रस्तुत किया गया था। पीड़ित व्यवसायी का कहना है कि यह वाकया केवल उसके दुकान का नहीं अपितु आवश्यक वस्तुओं के दुकानों को छोड़कर नगर के समस्त व्यावसायिक प्रतिष्ठान लाँकडाउन में बंद रहा है, तथा उनके भी बिलों में डोरलाँक अंकित कर औसत से अधिक खपत दर्शाया गया है। विमं रतनपुर से आग्रह करते हैं कि इस गोलमाल की गहन जाँच कर दोषी के विरुद्ध सख्त कार्यवाही करे। स्थानीय स्तर में न्याय नहीं मिलने पर मामले की शिकायत कार्यपालन/ मुख्य अभियंता के समक्ष प्रस्तुत कर उच्च स्तरीय विभागीय जाँच की माँग रखा जायेगा। रतनपुर स्टेशन को गतौरी और कोटा फीडरों से माँग के अनुरूप बिजली प्रदाय किया जाता है। ठीक उसी प्रकार जैसे उपभोक्ताओं को मीटर लगवाने के समय माँगपत्रक में याचित खपतभार के आधार पर विमं द्वारा औसतभार की गणना कर कनेक्शन दिया जाता है तथा उसी आधार पर बिजली बिल थमाया जाता है। प्रश्न उठता है कि लाँकडाउन के दौरान बंद पड़े प्रतिष्ठानों में फाल्स खपत दर्शाकर बचाये गये दैनिक औसतभार बिजली का उपयोग विमं द्वारा कहाँ किया गया? कहीं ऐसा तो नहीं कि दिखावा के लिये मुख्य द्वार पर ताला लटकाकर भीतर भीतर कारोबार संचालित होने वाले औद्योगिक ईकाइयों को बचत औसतभार का बिजली बेच दिया गया हो और बिल आम तथा व्यवसायी उपभोक्ताओं के माथे मढ़ दिया गया हो? बहरहाल गेंद विद्युत मंडल के पाला में है। देखना है कि विभाग उपभोक्ता की शिकायत पर कितनी गंभीरता से जाँच करती है।