पी.एम. धन धान्य कृषि योजना एवं दलहन आत्मनिर्भरता मिशन का शुभारंभ

पी.एम. धन धान्य कृषि योजना एवं दलहन आत्मनिर्भरता मिशन का शुभारंभ
  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 42 हजार करोड़ रुपये की कृषि परियोजना का किया शुभारंभ
   बेमेतरा (छत्तीसगढ़ महिमा)। 12 अक्टूबर 2025,  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कर-कमलों से आज किसानों के लिए ऐतिहासिक दिवस रहा। प्रधानमंत्री जी ने देश के किसान भाई-बहनों को ₹42,000 करोड़ की कृषि परियोजना का उपहार देते हुए “पी.एम. धन-धान्य कृषि योजना” एवं “दलहन आत्मनिर्भरता मिशन” का शुभारंभ किया। साथ ही कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र की 1100 से अधिक परियोजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास किया गया।
 बेमेतरा में सीधा प्रसारण एवं कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन
इस अवसर पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के अंतर्गत कृषि विज्ञान केन्द्र बेमेतरा में कार्यक्रम का सीधा प्रसारण सह एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में विजेन्द्र राठी सदस्य प्रदेश कार्यकारिणी समिति भाजपा किसान मोर्चा एवं पूर्व जिलाध्यक्ष भाजपा किसान मोर्चा उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों में गोवेन्द्र पटेल पूर्व सभापति कृषि स्थाई समिति,राजू गायकवाड़ भाजपा मंडल अध्यक्ष भीम सिंह वर्मा,सरपंच ग्राम पंचायत बहेरा फेरहा राम साहू, सरपंच ग्राम पंचायत ढोलिया कमलेश सिंह वर्मा,सरपंच प्रतिनिधि ग्राम पंचायत झाल तथा वी.के. टंडन,वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी,विकासखंड बेमेतरा उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ छत्तीसगढ़ महतारी के पूजन,अतिथियों के स्वागत एवं कृषि विज्ञान केन्द्र, बेमेतरा के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख तोषण कुमार ठाकुर के उद्बोधन के साथ हुआ। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार किसान अपने परिवार की खाद्यान्न आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु विविध फसलों की खेती लघु स्तर पर करते हैं, उसी प्रकार देश स्तर पर भी तिलहनी एवं दलहनी फसलों की खेती का रकबा बढ़ाना आवश्यक है। फसल विविधिकरण से देश खाद्यान्न आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का वर्चुअल संबोधन
निर्धारित समय पर दिल्ली से आयोजित माननीय प्रधानमंत्री के कार्यक्रम का सीधा प्रसारण कृषकों को दिखाया गया। प्रधानमंत्री ने पी.एम. धन-धान्य कृषि योजना सहित 42,000 से अधिक परियोजनाओं का शिलान्यास किया और कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले किसानों को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि आज का दिन देश की कृषि आत्मनिर्भरता के इतिहास में एक मील का पत्थर है। ‘पी.एम.धन-धान्य कृषि योजना’ और ‘दलहन आत्मनिर्भरता मिशन’ से देश के किसानों को नई ऊर्जा और नई दिशा मिलेगी। प्रधानमंत्री ने बताया कि देश में 10,000 से अधिक एफ.पी.ओ. (कृषक उत्पादक संगठन) बनाए गए हैं। 100 जिलों का चयन पी.एम. धन-धान्य कृषि योजना एवं दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के लिए किया गया है, जो 36 अन्य योजनाओं के समन्वय से संचालित होगी।
 केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का संबोधन
केंद्रीय कृषि,पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने उद्बोधन में कहा कि कृषि यंत्रों पर जी.एस.टी. की दरों में कमी की गई है तथा सरसों, कुसुम जैसी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी की गई है। उन्होंने बताया कि उर्वरकों के मूल्यों में कमी कर किसानों की उत्पादन लागत घटाई जा रही है। अब तक ₹10,000 करोड़ से अधिक की ऋण राशि किसानों को प्रदान की जा चुकी है तथा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत ₹1 लाख 83 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि किसानों को दी गई है। उन्होंने किसानों से दलहनी फसलों के उत्पादन को बढ़ाने का आह्वान किया ताकि देश आत्मनिर्भर बने। सीधे प्रसारण के उपरांत मुख्य अतिथि विजेन्द्र राठी ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा अमोरा घाट बैराज के माध्यम से ₹3.5 करोड़ की लागत से बेमेतरा जिले में सिंचाई हेतु जल उपलब्ध कराने के निर्णय की सराहना की।
उन्होंने कहा कि इससे जिले के किसानों को उन्नत खेती के लिए नए अवसर प्राप्त होंगे और कृषि में सकारात्मक परिवर्तन आएगा। गोवेन्द्र पटेल ने कहा कि देश को दलहन एवं तिलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनना अत्यंत आवश्यक है। देश में दाल व तेल का आयात होने से आर्थिक नुकसान होता है। किसानों को धान के रकबे में कमी कर दलहन व तिलहन की खेती बढ़ाने की दिशा में कदम उठाना चाहिए। वहीं वी.के.टंडन वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी ने कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए कृषकों को उनका लाभ लेने हेतु प्रेरित किया।
   तकनीकी सत्र एवं कृषक - वैज्ञानिक परिचर्चा
कार्यक्रम के तकनीकी सत्र में कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक डॉ.जितेन्द्र कुमार जोशी,श्रीमती रजनी डी. अगाशे, डॉ.लव कुमार एवं डोमन सिंह टेकाम ने कृषकों के साथ वैज्ञानिक परिचर्चा की। उन्होंने किसानों की तकनीकी समस्याओं के समाधान बताए तथा रबी फसलों की तैयारी, कम वर्षा की स्थिति में कम पानी वाली फसलों की उन्नत खेती के सुझाव दिए। साथ ही पशुपालन, मत्स्य पालन, मशरूम उत्पादन जैसे सहायक व्यवसाय अपनाने पर भी बल दिया, जिससे कम वर्षा या असामान्य मौसम में भी किसानों को अतिरिक्त आय प्राप्त हो सके।
       प्रदर्शन इकाइयों का भ्रमण एवं समापन
कार्यक्रम के अंत में कृषकों को कृषि विज्ञान केन्द्र बेमेतरा की विभिन्न प्रदर्शन इकाइयों का भ्रमण कराया गया। कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केन्द्र एवं कृषि विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, जनप्रतिनिधि तथा जिले के विभिन्न ग्राम पंचायतों के 200 से अधिक कृषक गण उपस्थित रहे।