आज मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का मुंगेली दौरा, क्या यह आगमन जमीनी समस्याओं के समाधान का माध्यम बनेगा या औपचारिकता तक सीमित रहेगा?

अरविंद बंजारा, छत्तीसगढ़ ब्यूरो चीफ 
मुंगेली । छत्तीसगढ़ महिमा । मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रस्तावित मुंगेली दौरे मुंगेली के सेतगंगा, लोरमी के लालपुर में गुरु घासीदास जयंती के अवसर को लेकर प्रशासनिक तैयारियां तेज हो गई हैं। सड़कें साफ कराई जा रही हैं, चौक-चौराहों को सजाया जा रहा है और अधिकारियों की बैठकें लगातार हो रही हैं। लेकिन इन तैयारियों के बीच आम जनता के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या मुख्यमंत्री का यह दौरा वास्तव में जिले की जमीनी समस्याओं को समझने और सुलझाने के लिए है, या फिर यह भी पिछले दौरों की तरह औपचारिक कार्यक्रमों तक ही सीमित रह जाएगा। मुंगेली जिले में इन दिनों पेयजल संकट गहराता जा रहा है। कई ग्रामीण इलाकों में पानी टंकियां बनी तो हैं, लेकिन वे चालू नहीं हो पा रही हैं। धान उपार्जन केंद्रों में खरीदी तो हो रही है, लेकिन मिलरों द्वारा समय पर धान का उठाव नहीं होने से किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा अधूरी सड़कें, लगातार बिजली कटौती और युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी जैसी समस्याएं लंबे समय से बनी हुई हैं। मुख्यमंत्री के दौरे से ठीक पहले प्रशासनिक अमले का अचानक सक्रिय होना भी चर्चा का विषय बन गया है। जिन सड़कों की मरम्मत की मांग वर्षों से की जा रही थी, वे अब जल्दबाजी में सुधारी जा रही हैं। इससे यह सवाल उठना लाजिमी है कि अगर यही गंभीरता पूरे साल रहती, तो जिले की तस्वीर पहले ही बदल चुकी होती। जनता आशंका जता रही है कि दौरा समाप्त होते ही यह सक्रियता भी ठंडी न पड़ जाए।

राजनीतिक दृष्टि से भी मुंगेली इन दिनों सुर्खियों में है। भाजपा संगठन के भीतर उपेक्षा और आपसी खींचतान की चर्चाएं आम हैं। स्थानीय कार्यकर्ताओं और पदाधिकारी का कहना है कि उनकी बातों को न तो संगठन में सुना जा रहा है और न ही प्रशासन में। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय तक वास्तविक स्थिति पहुंच पाएगी या फिर उन्हें केवल सकारात्मक रिपोर्टों के सहारे एक बेहतर तस्वीर दिखाने की कोशिश की जाएगी।
पूर्व के अनुभव बताते हैं कि बड़े नेताओं के दौरों के दौरान मंच से घोषणाएं तो होती हैं, लेकिन उनका अमल ज़मीनी स्तर पर कमजोर रहता है। मुंगेली की जनता इस बार केवल आश्वासन नहीं, बल्कि समयबद्ध और ठोस निर्णय चाहती है, खासकर किसानों, मजदूरों, महिलाओं और युवाओं के लिए।
दौरे को लेकर एक और बड़ा सवाल यह है कि क्या मुख्यमंत्री आम जनता से सीधा संवाद करेंगे या फिर कार्यक्रम सीमित दायरे में ही सिमटकर रह जाएगा। यदि आम नागरिकों को अपनी समस्याएं सीधे रखने का अवसर नहीं मिला, तो इस दौरे की सार्थकता पर सवाल उठना तय है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का मुंगेली दौरा तभी सफल माना जाएगा जब वह केवल मंच, भाषण और व्यवस्थाओं तक सीमित न रहकर जमीनी हकीकत को समझने और स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाने वाला साबित हो। मुंगेली की जनता अब दिखावे से आगे बढ़कर वास्तविक बदलाव की प्रतीक्षा कर रही है।