सिद्ध खोल जल प्रपात बना आकर्षकण का केंद्रमनोरम दृश्य और खूबसूरती पर्यटकों को लुभा रहा


 छत्तीसगढ़ महिमा गिरौदपुरी। 16 जुलाई 2022,
 एक ऐसा नजारा जिसे देखकर प्राकृतिक के गोद में समाने का मन करेगा, जहां आकर वहीं का हो जाने का मन होगा, प्रकृति से मन मोह लेने वाला मनोरम दृश्य है। प्रकृति का ऐसा दृश्य जो जन्नत से कम नहीं है, चारों तरफ खामोशी और प्रकृति का सौंदर्य रूप पर्यटकों का मन मोह ले रहे हैं। चारों ओर वनों से आच्छादित है ये दुनिया यहां आने वाले पर्यटक खूबसूरत वादियों में खो जाते है। जिला बलौदा बाजार के विकास खंड कसडोल मुख्यालय से 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है सिद्ध खोल जलप्रपात, जो अपने मनोरम दृश्य और खूबसूरती से पर्यटकों को  लुभा रहा है। जहां 40 फीट की ऊंचाई से गिरता जलप्रपात पर्यटकों को "सिद्ध खोल का खूबसूरत नजारा देखने को मिलता है। जिस जलप्रपात को सिद्धबाबा के नाम से भी जाना जाता है। हजारों की संख्या में आनंद लेने पर्यटक गण जिले के आलावा प्रदेश के विभिन्न स्थानों से देखने आते है। सिद्ध खोल जंगल जलप्रपात घने खोल जलप्रपात प्रपात के आस के बीच में स्थित है। सिद्ध बाबा के पास घने वन उसके प्रकृति खूबसूरती को और बढ़ा देते है खास कर बारिश के दौरान पर जलप्रपात की खूबसूरती सौ गुना बढ़ जाते है और बस पर्यटक यहां खिंचे चले आते हैं।
       "सिद्ध खोल जलप्रपात बना आकर्षकण का केंद्र
 पर्यटकों ने कहा, वाह"
सोललकानन कर हम लोग यहा पहुंचे है, यह बहुत अच्छा है, ना देखने लायक कोई चीज नहीं रहा है, 
जिसमे करीबन 40 फिट ऊंची झरना गिर रहा हैं इसका नजारा बेहद शानदार है। गजेन्द्र साहू (पर्यटक)
      सुविधाएं भी मिल रही है निश्चित ही धरोहर सिद्ध बाबा जलप्रपात है जो हमारे क्षेत्र में इतना जल प्रकार है, लेकिन वन विज्ञान को आकर्षण बनाने के सार्थक प्रयास करना चाहिए।
   योगेश्वर नादिया रेजर,सोनाखान रेज का कहना है कि - यहां की जो अव्यवस्था है उन्हे आप लोगों के खबर प्रकाशित पर पता चला है जिसे सुधार सुरक्षित रख रखाव स्वच्छता विकास कार्य कराए जाने पर पहल कराने दिखवा कर पूर्ण कराने की बात कही गई हैं।
वॉच टावर से दिखता है दृश्य यहां पर्यटकों की सुविधा के लिए वन विभाग द्वारा वाच टावर और छाया के लिए कुटी है। सुरक्षा के लिए चारों तरफ से गया है। वाच टावर में चढ़ कर चारों तरफ का नजारा का आनंद उठा सकते हैं, यहां एक मंदिर भी है, जहां लोग पूजा भी करते हैं और भगवान का नाम लेते हैं। यहां के 40 फीट की ऊंचाई से गिरता झरना कुदरत का मनोरम नजारा देखने को मिलता है जहां बड़ी संख्या में पिकनिक मनाने लोग आते हैं और कुछ पर्यटक अपनी जान को जोखिम में डाल कर भी 40 फीट की ऊंचाई से नीचे पानी में कुदते है।
 कुछ पर्यटक सेल्फी लेने के लिए जल के किनारे चले जाते हैं जो खतरों से खाली नहीं है। 
वन विभाग द्वारा मोटरसाइकिल और कार में आने वाले पर्यटकों से पार्किंग व्यवस्था के नाम पर 10 से 20 रूपए शुल्क वसूला भी जाता है। इसके वजूद भी यहां की साफ सफाई और शौचालय की कोई उचित व्यवस्था की कमी खलता है स्वच्छता रख रखाव आम जनता को सर्व सुविधा उपलब्ध कराने वन विभाग द्वारा विशेष पहल किया जाना चाहिए जिनका अभाव देखने को मिलता है। यहां कुछ ऐसे भी पर्यटक आते है जो मांस मंदिरा का सेवन कर गंदगी फैला कर चले जाते है। यहां मांस मंदिरा सेवन पर प्रतिबंध लगा दिया जाना चाहिए।
 इस ओर विशेष पहल करने पर्यटकों की हमेशा से मांग किया जा रहा है कि पर्यटकों को सुरक्षा के लिए पुलिस और के कर्मचारियों को तैनाती जरूरी है, लेकिन अभी तक इस दिशा पर अमल नहीं हो सका है।
जिम्मेदार विभागीय अधिकारियों शासन प्रशासन द्वारा जन भावनाओं पर्यटन स्थल की विशेष ध्यान रख कमियों को दूर करने सतत विकास कार्यों को पूरा कराने तत्पर होना चाहिए।